सत्य मेव जयते : संसद में कुछ और वास्तविक कुछ और !: संसद में कुछ और वास्तविक कुछ और ! इस देश में नेताओं के दाँत भी हाथी के दाँत की तरह से खाने के और दिखाने के और है ; संसद चल रही थी सुषमा ...
Makkhan Lal Poonia
Friday, 7 December 2012
संसद में कुछ और वास्तविक कुछ और !
कुछ देर बाद एक महाशय और खड़े हुए और खूब गरम जोश में FDI का विरोध किया वो थे बहन मायावती के पार्टी से, देखने में ऐसा लग रहा था पूरे देश की चिंता इन्ही पार्टियों को है बार बार सांसद संख्या से दुखी मुलायम जी ने इस देश के सामने क्या ड्रामा किया देखने लायक था ,
अंत में वोटिंग के समय पता चला कि मुलायम और मायावती की पार्टी तो वोटिंग ही नहीं कर रही तो फिर संसद में ये भाषण किस लिए ,क्यों आम आदमी को भ्रमित किया जा रहा है ,क्यों किसी का समय बर्बाद करने लगे है ये नेता देश की सेवा तो ये लोग नहीं कर सकते पर जनता के साथ ये किस तरह का मजाक है !
मेरे विचार से इस संसद में कुछ भी ये नेता तय नहीं करते सब कुछ पहले से तय होता है केवल जनता को दिखने के लिए ये सब किया जाता है !ये चोर चोर मौसेरे भाई है ! इन सब को विदेशी कम्पनियों ने खरीद लिया है !अब जनता से वोट मांगने पर न जाने क्या -क्या बहाने बनायेंगे !
भाई अरविन्द केजरीवाल ने सच ही कहा है कि ये सब जनता को भ्रमित कर रहे है बाकी सब ये एक ही है ! मुलायम और माया तो करते भी क्या अगर विपक्ष में वोटिंग करते तो सीबीआई से कौन बचाए और सीबीआई कांग्रेस की एजेंसी तो फिर संसद में बहस की जरूरत कहाँ थी
में हूँ ,आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
Monday, 3 December 2012
गाँधी जी का अहिंसा वादी भारत
Makkhan Lal Poonia
गाँधी जी का अहिंसा वादी भारत :- दादाजी जी की वो बात आज भी मुझे अच्छी तरह से याद है , में बहुत बार याद करके मन ही मन में गर्व महशुश करता हूँ कि मुझे भी अहिंसा वादी दादाजी के संस्कार मिले !
बात उन दिनों की ह जब गाँव में लोग फसल काट कर अपने खेत से घर लाते थे , ज्यादातर लोग अपनी फसल बेल गाड़ी या भेंसा गाड़ी या फिर ऊँट गाड़ी से लाते थे , में भी दादाजी के साथ खेत में गया हूवा था जिसे हम फ़िलहाल देव नगर (भांड याली ) के नाम से जानते है , शाम के लगभग 6:00 का समय था ,चारों और से पक्षियों की आवाज सुनाई दे रही थी , हम भी हमारे गाँव (गुंगारा ) में प्रवेश किया ,दादाजी गाड़ी के पीछे चल रहे थे, में उनके साथ था , गाँव में एक बुजरग वक्ती अपने घर से बहार निकला और दादाजी को को गाली बक दी , दादाजी ने पहले तो ध्यान से सुना और और फिर उस बुजरग वक्ती को बोले " देख वो , कशोक बोल्यो हे , कोई बात कोनि , आज्या चिलम पील , उसके गाली बोलने पर भी दादाजी ने बिलकुल घुसा नहीं किया और उसको सामान दिया ! ये सुनते ही वो वक्ति शर्मिंदा हो कर अपने घर में घुस गया , वहां पर खड़े कई लोग देखते ही रह गए ! उस दिन बाद वो वक्ती दादाजी के सामने आने से भी शर्मिंदा होता था !
ये शब्द बोलने के पीछे उस वक्ति का कारण ये था कि मेरे बड़े भैया और उस वक्ति का लड़का दोनों एक साथ रहते थे और शाम को देर तक घर नहीं लोटते थे और वो मेरे भाई की वजह से दादाजी को गाली दे रहा था !
एसी बहुत सी बात मेरे दादाजी में थी , जेसे दादाजी कहीं भी जाते तो रास्ते में सभी से राम - राम करके चलते थे कभी भी किसी का बुरा नहीं सोचते थे और तो और रास्ते में पड़ी छड़ी को भी रास्ते वो हटाये बगेर नहीं चलते थे !
में हूँ ! आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
गाँधी जी का अहिंसा वादी भारत :- दादाजी जी की वो बात आज भी मुझे अच्छी तरह से याद है , में बहुत बार याद करके मन ही मन में गर्व महशुश करता हूँ कि मुझे भी अहिंसा वादी दादाजी के संस्कार मिले !
बात उन दिनों की ह जब गाँव में लोग फसल काट कर अपने खेत से घर लाते थे , ज्यादातर लोग अपनी फसल बेल गाड़ी या भेंसा गाड़ी या फिर ऊँट गाड़ी से लाते थे , में भी दादाजी के साथ खेत में गया हूवा था जिसे हम फ़िलहाल देव नगर (भांड याली ) के नाम से जानते है , शाम के लगभग 6:00 का समय था ,चारों और से पक्षियों की आवाज सुनाई दे रही थी , हम भी हमारे गाँव (गुंगारा ) में प्रवेश किया ,दादाजी गाड़ी के पीछे चल रहे थे, में उनके साथ था , गाँव में एक बुजरग वक्ती अपने घर से बहार निकला और दादाजी को को गाली बक दी , दादाजी ने पहले तो ध्यान से सुना और और फिर उस बुजरग वक्ती को बोले " देख वो , कशोक बोल्यो हे , कोई बात कोनि , आज्या चिलम पील , उसके गाली बोलने पर भी दादाजी ने बिलकुल घुसा नहीं किया और उसको सामान दिया ! ये सुनते ही वो वक्ति शर्मिंदा हो कर अपने घर में घुस गया , वहां पर खड़े कई लोग देखते ही रह गए ! उस दिन बाद वो वक्ती दादाजी के सामने आने से भी शर्मिंदा होता था !
ये शब्द बोलने के पीछे उस वक्ति का कारण ये था कि मेरे बड़े भैया और उस वक्ति का लड़का दोनों एक साथ रहते थे और शाम को देर तक घर नहीं लोटते थे और वो मेरे भाई की वजह से दादाजी को गाली दे रहा था !
एसी बहुत सी बात मेरे दादाजी में थी , जेसे दादाजी कहीं भी जाते तो रास्ते में सभी से राम - राम करके चलते थे कभी भी किसी का बुरा नहीं सोचते थे और तो और रास्ते में पड़ी छड़ी को भी रास्ते वो हटाये बगेर नहीं चलते थे !
में हूँ ! आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
Friday, 9 November 2012
केजरीवाल का एक और बड़ा खुलासा आज
केजरीवाल का एक और बड़ा खुलासा आज :-सभी पार्टियों में आज फिर से डर हो गया कि केजी न मालूम कोनसा खुलासा करने वाले हँ ! भारत को आज आजाद हुए काफी समय हो गया पर किसी भी राजनेता या पार्टी में इतना डर पहले कभी देखने को नहीं मिला जो आज मिल रहा ह ! भारत जेसे लोकतंत्र में दिनों -दिन बड़ी पार्टियों जनता के साथ आये दिन जो हत्याचार सता का हिस्तेमाल करके करते ह बहुत ही दुखद हं !
इन सभी बड़े खुलासों में मिडिया की भूमिका भी काफी सराहनीय ह जो जनता को इन सब से रूबरू करने सक्षम हूही ह ये बड़ी पार्टिया आज मिडिया को भी अपनी चुंगल में फ़साने का भरसक प्रयास करती ह परत्नु कुछ दिनों से मिडिया से जनता को देखने को मिला ह व् संतोष प्रद हं !मिडिया को आज अपनी जिमेदारी को नेतिक आधार मानते हुए जनता को उनके हक़ का एहसाश जरुर करवाना चाहिए तभी आम आदमी अपनी लोकतंत्र की रक्षा करने में आगे आयेंगे !आज कम्पूटर युग में हमें सभी जानकारी जल्दी व् सही मिल जाती हं हमें इसका फायदा भी उठाना चाहिए !
जब हम आपस में कई बार बात करते हं कि केजरीवाल देश का बविश्य हं तब सभी के अलग -अलग विचार उभर कर सामने आते ह कोई बोलता ह इसमें विदेशी ताकतों का हाथ ह कोई बोलता ह ये सब एक ही ह आगे जाकर ये भी इन नेताओं की तरह से हो जायेगा ,इसमें अमेरिका का हाथ ह ,ये देश को बरबाद कर देगा ,ये सब सुनकर ये लगता ह इन नेताओं ने देश की जनता को कितना निराशा वादी बना दिया ह ,और ये विचार आना स्वाभविक भी ह इस देश की जनता को सत्य से भी मुकरने में भी अब झिझक नहीं रही !
हमारे देश की लगभग ये भावना हो गयी ह कि कोई भी आरोप या प्रत्यारोप करता ह तो इसमें विदेशी ताकतों का हाथ ह ये वरना कर ही नहीं सकता !अभी रिलायंस कम्पनी पर आरोप लगाये तो कुछ ने कहा अरे ये तो देश को चला रहा ह में पूछना चाहता हूँ क्या रिलायन्स इस देश से भी बड़ा ह मेरा कहने का मकसद यही ह कि हमारी सोच बहुत ही कमजोर हो चुकी ह इन नेताओं की वजह से हमें इस देश के भविष्य के लिए सोच में परिवर्तन करना होगा वरना इस देश को बहुत समस्याओं का सामना करना होगा,हम में सत्य को स्वीकार करने की शक्ति होनी चाहिए तब ही गाँधी के सपने साकार होंगे
में हूँ !आम आदमी
मक्खन लाल पूनिया
हमारे देश की लगभग ये भावना हो गयी ह कि कोई भी आरोप या प्रत्यारोप करता ह तो इसमें विदेशी ताकतों का हाथ ह ये वरना कर ही नहीं सकता !अभी रिलायंस कम्पनी पर आरोप लगाये तो कुछ ने कहा अरे ये तो देश को चला रहा ह में पूछना चाहता हूँ क्या रिलायन्स इस देश से भी बड़ा ह मेरा कहने का मकसद यही ह कि हमारी सोच बहुत ही कमजोर हो चुकी ह इन नेताओं की वजह से हमें इस देश के भविष्य के लिए सोच में परिवर्तन करना होगा वरना इस देश को बहुत समस्याओं का सामना करना होगा,हम में सत्य को स्वीकार करने की शक्ति होनी चाहिए तब ही गाँधी के सपने साकार होंगे
में हूँ !आम आदमी
मक्खन लाल पूनिया
Wednesday, 7 November 2012
सत्यता से दूर भागते भारतीय राजनीतिक दल :-
सत्यता से दूर भागते भारतीय राजनीतिक दल :-
आज देश में सभी पार्टियाँ दिनों दिन झूंठ का सहारा लेकर अपना - अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगी ह,अपनी आत्मा की बात को दबाया जा रहा ह और जो पार्टियों में ऊपर से आवाज उठाई जाती ह सभी उसी का अनुसरण करने में लग जाते ह चाहे उसमे सच्चाई हो ना हो अपने विवेक को कहीं भी इस्तेमाल करने से कतराते हं आज पार्टी के निचे के लोग जो भी बोलते ह पहले उनको ये घबराहट होने लग जाती ह कि में जो बोल रहा हूँ वो पार्टी को कहीं चोट तो नहीं पहुंचा रही ह चाहे उसमे सत्यता हो या न हो !
अभी दो दिन पहले बी जेपी अधेक्ष नितिन गडकरी जी ने कहा कि शायद विवेकान्द और दाउदी इब्राहीम की आई क्यों एक ही रही होगी,लेकिन विवेकान्द जी ने सामाजिक कार्यों में इसका इस्तेमाल किया और दाउद इब्राहीम ने आतंक के क्षेत्र में दोनों ने ही अपने क्षेत्र में बढ़िया काम किया ! मेरे हिसाब से तो इस वाक्य में कोई गलत बात नहीं ह इस में दोनों की बुधि इस्तेमाल पर गडकरी ने अपने मत वेक्त किया ह और इसमें पार्टी में इतना बवाल पैदा हो गया !
मेरा कहने का ये मकसद ह कि आज हमारी सभी राजनेतिक पार्टियों को इन आपसी तुच्छ विचारों से ऊपर उठ कर देश को एक परिवार की तरह मानकर चलना चाहिय और समाज के हित में निर्णय लेकर ही हमेशा अपने विचार रखने चाहिय न कि पार्टी स्वार्थ में !

जिसमें सत्य को सत्य एवं असत्य को असत्य कहने का साहस हो, जो चाटुकारिता में नहीं बल्कि राज्यहित में विश्वास रखता हो, जो मान अपमान से परे हो, जिसे धन का लोभ न हो, जो कंचन व कामिनी से अप्रभावित रहे उसी व्यक्ति को राजा को अपना मंत्री अथवा गुरू नियुक्त करना चाहिये - चाणक्य नीति
जनता को अपने उमीदवार उपरोक्त वाक्य को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए अगर जनता ऐसा करने में सक्षम नहीं ह तो उस राज्य की जनता अपना राज्य धर्म से भटक गयी मानो और जनता अपने नेतिक कर्तव्यों का भूल रही ह और ये हमेशा राज्य हित में नहीं होगा !
कल अमेरिका के हाल ही में जीत दर्ज कराने वाले राष्ट्रपति बराक ओबामा का भाषण वास्तव में एक देश को परिवार की तरह से रखने वाला था ओबामा जी ने अपने भाषण में मुख्य रूप से निम्न बातें कही :-
जनता के सामने अब केजरीवाल और उनकी टीम ने इन नेताओं की हकीकत को सामने रखने से सभी पार्टियाँ बोखला गयी ह एक विधायक ने तो ये तक बोल दिया कि अरविन्द केजरीवाल को दस वोट भी नहीं मिलेंगे जबकि विधायक जी ये प्रश्न किसी ने नहीं किया इससे तो मुझे यही लगता ह कि इन सब नेताओं को अब केजरीवाल का डर तो सताने लग गया ह अगर जनता ने ये समझने में देरी नहीं की तो अब जल्दी ही यहाँ पर हमें एक अच्छा परिवार का रूप देखने को मिलेगा और तब जाकर आम आदमी की इस देश में भागीदारी बढेगी !
में हूँ !आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
आज देश में सभी पार्टियाँ दिनों दिन झूंठ का सहारा लेकर अपना - अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगी ह,अपनी आत्मा की बात को दबाया जा रहा ह और जो पार्टियों में ऊपर से आवाज उठाई जाती ह सभी उसी का अनुसरण करने में लग जाते ह चाहे उसमे सच्चाई हो ना हो अपने विवेक को कहीं भी इस्तेमाल करने से कतराते हं आज पार्टी के निचे के लोग जो भी बोलते ह पहले उनको ये घबराहट होने लग जाती ह कि में जो बोल रहा हूँ वो पार्टी को कहीं चोट तो नहीं पहुंचा रही ह चाहे उसमे सत्यता हो या न हो !
अभी दो दिन पहले बी जेपी अधेक्ष नितिन गडकरी जी ने कहा कि शायद विवेकान्द और दाउदी इब्राहीम की आई क्यों एक ही रही होगी,लेकिन विवेकान्द जी ने सामाजिक कार्यों में इसका इस्तेमाल किया और दाउद इब्राहीम ने आतंक के क्षेत्र में दोनों ने ही अपने क्षेत्र में बढ़िया काम किया ! मेरे हिसाब से तो इस वाक्य में कोई गलत बात नहीं ह इस में दोनों की बुधि इस्तेमाल पर गडकरी ने अपने मत वेक्त किया ह और इसमें पार्टी में इतना बवाल पैदा हो गया !
मेरा कहने का ये मकसद ह कि आज हमारी सभी राजनेतिक पार्टियों को इन आपसी तुच्छ विचारों से ऊपर उठ कर देश को एक परिवार की तरह मानकर चलना चाहिय और समाज के हित में निर्णय लेकर ही हमेशा अपने विचार रखने चाहिय न कि पार्टी स्वार्थ में !

जिसमें सत्य को सत्य एवं असत्य को असत्य कहने का साहस हो, जो चाटुकारिता में नहीं बल्कि राज्यहित में विश्वास रखता हो, जो मान अपमान से परे हो, जिसे धन का लोभ न हो, जो कंचन व कामिनी से अप्रभावित रहे उसी व्यक्ति को राजा को अपना मंत्री अथवा गुरू नियुक्त करना चाहिये - चाणक्य नीति
जनता को अपने उमीदवार उपरोक्त वाक्य को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए अगर जनता ऐसा करने में सक्षम नहीं ह तो उस राज्य की जनता अपना राज्य धर्म से भटक गयी मानो और जनता अपने नेतिक कर्तव्यों का भूल रही ह और ये हमेशा राज्य हित में नहीं होगा !
कल अमेरिका के हाल ही में जीत दर्ज कराने वाले राष्ट्रपति बराक ओबामा का भाषण वास्तव में एक देश को परिवार की तरह से रखने वाला था ओबामा जी ने अपने भाषण में मुख्य रूप से निम्न बातें कही :-
- अमेरिका एक परिवार की तरह से ह और में इस परिवार के मुखिया होने के नाते सब को साथ लेकर चलूँगा !
- हम हमारे बचों को एक सुरक्षित वातावरण देंगे !
- हमारे बच्चों को उच्च शिक्षा देने का हमारा कर्तव्य ह !
- हम सब सामाजिक,संस्कर्तिक ,राजनेतिक भेद भाव से ऊपर उठ कर एक संगठित अमेरिका का निमार्ण करेंगे !
जनता के सामने अब केजरीवाल और उनकी टीम ने इन नेताओं की हकीकत को सामने रखने से सभी पार्टियाँ बोखला गयी ह एक विधायक ने तो ये तक बोल दिया कि अरविन्द केजरीवाल को दस वोट भी नहीं मिलेंगे जबकि विधायक जी ये प्रश्न किसी ने नहीं किया इससे तो मुझे यही लगता ह कि इन सब नेताओं को अब केजरीवाल का डर तो सताने लग गया ह अगर जनता ने ये समझने में देरी नहीं की तो अब जल्दी ही यहाँ पर हमें एक अच्छा परिवार का रूप देखने को मिलेगा और तब जाकर आम आदमी की इस देश में भागीदारी बढेगी !
में हूँ !आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
Sunday, 4 November 2012
भूल करने में पाप तो है ही, परंतु उसे छिपाने में उससे भी बड़ा पाप है | -महात्मा गाँधी
भूल करने में पाप तो है ही, परंतु उसे छिपाने में उससे भी बड़ा पाप है | -महात्मा गाँधीआज दिल्ली में कांग्रेस ने रेली करके जगह जगह से जनता को परेशान किया और जनता को बहला फुसला कर दिल्ली ले जाया गया और भीड़ इक्कठी की गयी क्या अर्थ निकला इसका , जनता को भर्मित किया जा रहा ह ये वो एक बहुत बड़े पाप के भागीदार हो गए ह जो अपनी हकीकत को छिपा कर किया ह !
चरित्र कि शुदी ही सारे ज्ञान का ध्येय होना चाहिए | -महात्मा गाँधी
ये कोंग्रेस बापू को आदर्श मानने की बातें तो आये दिन करती रहती ह पर ह सब कुछ ही अलग आज की रेली में सोनियां जी ने भाषण तो पढ़ दिया पर क्या वो ये जनता के सामने पिछली बातों को दूर कर सकेगी , कांग्रेस अपनी ऊपर लगे सभी भ्रस्ताचार के दाग इन भाषणों से जनता को भूला पायेगी ? ये हो नहीं सकता ,ये देश अपंग बेसहारा लोगों का सहारा छिनने वालों,गरीब के मुह से निवाला छिनने वाले ,इन कोंग्रेसियों को कभी नहीं भुला पायेगा में तो इस रेली से यही समजता हूँ कि अब हमें जल्दी ही एक और घोटाले का सामना करना पड़ेगा नहीं तो इस रेली में लगी इतनी बड़ी रकम कोई पेड़ से थोड़े तोड़ लेंगे ये सब जनता के मेहनत का पैसा ह जो भर्मित भाषण देकर ये सरकार जनता को लुटने में लगी ह !
अब ये सरकार अपने अन्दर झांककर देखनी कि सक्ती खो चुकी ह और तानाशाई करके बेचारी जनता को बेवकूप बना रही ह ,अब ये जनता इनके कारनामे भूल नहीं सक्ती ,जिस देश के प्रधानमत्री के पास बेसहारा लोगों से मिलने का टाइम तक नहीं ,संसद में सब ने जन लोकपाल कि तिन शर्तों को मानकर मुकरनी वाले ,दस दिनों तक देश के लाखों लोगों को भूखा देखकर भी इस सरकार को रहम नहीं आई आज वो बड़े बड़े पन्ने पड़कर जनता को संबोधन कर रही ह में तो ये मानता हूँ कि अब ये सरकार जनता का विस्वास खो चुकी ह सबसे निंदनीय प्रधानमंत्री जी को अब देश कि जनता से भाषण न करके अपने पद से इस्थिपा दे देना चाहिय उनको ये नहीं सोचना चाहिए कि हम ही इस देश को चला सकते ह ,कहीं तो गाँधी जी के आदर्शों को अपनाना चाहिए !
- बुराई से असहयोग करना मानव का पवित्र कर्तव्य है |- महात्मा गाँधी
में हूँ ! आम आदमी
मक्खन लाल पूनिया
Friday, 2 November 2012
करवा चोथ पर मेरी और से सब को शुभकामनायें
![]() |
कप कपाते हुए होंठों की शिकायत सुन ले;
आज इज़हारे ख़यालात का मौका दे दे;
हम तेरे शहर में आये हैं, मुसाफिर की तरह!
हसरतों पर रिवाजों का सख्त पहरा है;
न जाने कौन सी उम्मीद पर जाकर, यह दिल ठहरा है;
मेरी आँखों में से छलकते हुए यह अश्क और गम की कसम;
मेरा यह प्यार, बहुत गहरा है!

आपने नज़र से नज़र कब मिला दी;
हमारी ज़िन्दगी झूमकर मुस्कुरा दी;
जुबां से तो हम कुछ भी न कह सके;
पर निगाहों ने दिल की कहानी सुना दी!
अगर जिंदगी में जुदाई न होती;
तो कभी किसी की याद न आई होती;
अगर साथ गुजरा होता, हर लम्हा;
तो सायद रिस्तो में इतनी, गहराई न होती!
बदलना आता नहीं हमको मौसम की तरह;
हम हर एक रूप में तेरा इंतज़ार करते हैं;
न समेट सकोंगी तुम इसे क़यामत की तरह;
कसम तुम्हारी हम तुम्हें इतना प्यार करते हैं!
मक्खन
Thursday, 1 November 2012
Wednesday, 31 October 2012
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| मत पूछ मेरे सब्र की इन्तेहा कहाँ तक है; तु सितम कर ले, तेरी ताक़त जहाँ तक है; व़फा की उम्मीद जिन्हें होगी, उन्हें होगी; हमें तो देखना है, तू ज़ालिम कहाँ तक है! |
आज मनमोहन सरकार कठपुतली बन गयी ह इसकी डोर आज बड़े लोगो के हाथ में ह और बेचारे गरीब को इस सरकार से अब उमीद नहीं आम आदमी की सुनने वाले अब इस देश की सता हासिल नहीं कर सकते ये सरकार तो पेसे वालों की जेब तक सिमित हो गयी ह !
बापू ने शायद ही सोचा होगा कि मेरे नाम कि आड़ में ये लोग ऐसा भारत का निर्माण करेंगे! गांधीजी ने १९४७ में एक दीप हिंदुस्तान को दिया कि अब म रहू या न रहू पर ये दिया तो मेरे हिंदुस्तान को रोशन कर ही देगा घर घर में ये दिया उज्जाला लायेगा पर हुवा क्या ये देश के दलाल इस देश को आज कुछ लोगों का गुलाम बना कर रख दिया जो इसकी डोर चाहे जेसे हिलाए वेसे ही हिलती ह कोई वजूद इस देश में छोड़ा नहीं ये हो क्या गया मेरे बापू के देश को ! किसकी नजर लगी ह कुछ तो करना ही होगा,नज़र तो उत्तारनी ही होगी और ये देश कि जनता यानि आम आदमी ही उतार सकता ह खास तो इसमें युवा कि भूमिका बहुत जरुरी ह!
में केजरीवाल और उनकी टीम को शुक्रगुजार करता हूँ जो इस देश को इन सब बातों से अवगत कराया वर्ना हम तो इस मामले में बिलकुल ही अनपद ही थे !
वा रे मनमोहन जी केसा प्रधानमन्त्री ह इस देश का इतनी सब सुनने के बाद भी सीट के चिपक कर बैठा ह और सुनता भी ह तो केवल भ्र्स्ताचारियों कि और पेसे वालों कि वास्तव में मोन मोहन ह !
रामचंद्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आयेगा;
लोग हगेंगे खुले मैदान में, नेता लैट्रिन का पैसा खायेगा!
में हूँ, आम आदमी! मक्खन लाल पूनिया
Saturday, 27 October 2012
अनमोल वचन

अनमोल वचन
हर कदम चलो ऐसे कि निशान बन जायें;
यह जिंदगी तो सब काट लेते हैं;
जिंदगी ऐसे जियो कि मिसाल बन जाये!
विज्ञान कहता है के जीभ पर लगी चोट जल्दी ठीक होती है;और ज्ञान कहता है के जीभ से लगी चोट कभी ठीक नहीं होती है!
शीशा और रिश्ता वैसे दोनों नाजुक होते हैं;
बस फर्क तो इतना है कि शीशा गलती से टूट जाता है;
और रिश्ता गलतफैमियों से!
ताश के पत्तों से ताज महल नहीं बनता;
नदी को रोकने से समुंदर नहीं बनता;
लड़ते रहो ज़िन्दगी से हरपल;
क्योंकि एक जीत से कोई सिकंदर नहीं बनता!
अश्कों को आँखों की दहलीज पर लाया न करो;अपने दिल का हाल किसी को बताया न करो;
लोग मुट्ठी भर नमक लिए घूमा करते हैं;
अपने ज़ख़्म किसी को दिखाया न करो!

भगवान की भक्ति करने से शायद हमें माँ न मिले;
लेकिन माँ की भक्ति करने से भगवान् अवश्य मिलेंगे!
शाम सूरज को ढलना सिखाती है;
शमा परवाने को जलना सिखाती है;
गिरने वालों को तकलीफ तो होती है;
लेकिन ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है!
बुराई इसलिए नहीं पनपती की बुरा करने वाले लोग बढ़ गये हैं;
बल्कि इसलिए बढ़ती है, कि सहन करने वाले लोग बढ़ गये हैं!
संघर्स में आदमी अकेला होता है;
सफलता में दुनियां उसके साथ होती है;
जब-जब जग उस पर हँसा है;
तब-तब उसी ने इतिहास रचा है!
दुनियां का गरीब आदमी मंदिर के बाहर भीख मागता है;और दुनियां का अमीर आदमी मंदिर के अन्दर भीख मांगता!
किसी का साथ यह सोचकर मत छोड़िए, कि आपको देने के लिए उसके पास कुछ नहीं है! बस यह सोच कर साथ निभाएं कि, उसके पास कुछ नहीं है आपके सिवा खोने के लिए!
दर्द, हमेशा अपने ही देते हैं!
वर्ना गैरों को क्या पता कि आपको तकलीफ किस बात से होती है!
जब आप जीवन में सफल होते हैं;तब आप के दोस्तों को पता चलता है, कि आप कौन हैं!
जब आप जीवन में असफल होते हैं;तब आपको पता चलता है, कि आप के दोस्त कौन हैं!
डॉ.अब्दुल कलाम :- सबसे बड़ा मनुष्य का नेतिक धर्म एक गरीब परिवार के बच्चे को शिक्षा में सहयोग करना,होता ह न कि मंदिर या मस्जिद के बहार लगे भीड़ को भीख देना !
में हूँ ! आम आदमी - मक्खन लाल पूनिया
Wednesday, 24 October 2012
जोधपुर.ओसियां पशु मेले के समापन मौके पर मंगलवार को हिंदी फिल्म पहेली से सुर्खियां बटोरने वाला बादलिया ऊंट ढोल की थाप पर जमकर थिरका। मेले में सैलानियों के मनोरंजन के लिए उसे खास तौर पर लाया गया था। फौजी चाल, जमीन से पैसे उठाना, सलाम करना, कहे अनुसार कई काम करना, अतिथियों को माला पहनाना आदि करतब दिखाकर बादलिया ने सबका दिल जीत लिया। पर्यटन विभाग के पशुओं की सूची में भी इसका नाम पहले स्थान पर दर्ज है। 13 साल से बादलिया को उसके उस्ताद मौज अली ने छह माह की ट्रेनिंग देकर तैयार किया है।

ये राजस्थानी शान आज संसार में अलग ही महत्व रखती ह, हमारी धरोहर हमें गर्व महशुश कराती हँ ! राजस्थान का जहाज कहलाने वाला ऊंट जहाँ भी दिखाई दे वो राजस्थानी याद ताजा कर देता ह, ये घाघरा लुगडी देख कर मन खिल उठता ह पर आज आधुनिक तकनिकी की वजह से राजस्थानी पोशाक पर धीरे -धीर बुरा असर हम समाज में देख रहे ह हमारी संस्कृति पर गलत प्रभाव जो हो रहा ह वो बहुत ही चिंतनीय ह हम सबको इन गलत दिखावे से दूर हो कर हमें हमारी संस्क्रती को बचाने की हमारी जिमेदारी बनती ह और हमें इसे गर्व के साथ बचाना भी होगा!
जय राजस्थान ,जय किसान ,जय जवान
हमारी राजस्थानी धरती ने किसान ,और जवान में हमेशां अव्वल रही ह यहाँ के रणबाकुरों की गाथाएं सुनकर रोंगटे कड़ी कर देती हँ हम,यहाँ से ही महाराणा प्रताप ,झाँसी की रानी ,कुम्भा ,जेसी महान वीरों की कुर्बानी यहाँ की शान रही ह!
अत: हमारी संस्कर्ति को बचाने का हर राजस्थानी का गर्व होना चाहिए !
में हूँ , आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
Tuesday, 23 October 2012
गुंगारा निवासियों की माताजी पैदल यात्रा विशेष :-
गुंगारा निवासियों की माताजी पैदल यात्रा विशेष :-
दिनांक २१-१०-२०१२ को शुबह ५;३० बजे गुंगारा से माँ भवानी जीण माता के लिए पैदल यात्रा शुरू की,साथ में रिम-झिम डी.जे. व् एक ५२ शीटर बस
तथा कम से कम १५० आदमी जिसमे महिला,वृद,व् बच्चे सभी शामिल थे ,
जेसे ही गाँव के महला परिवार के पास से पैदल यात्रा शुरू हूही सतपाल धिवां ने डी.जे. पर ऐलान किया, गुंगारा वोसियो, सब को सूचित किया जाता ह कि सभी लोग नींद से जग कर नहाना धोना करके घर से बहार आये और माता के पैदल यात्रा में शरीक होने का कष्ट करें, जो वक्ती न नहाना चाहे वो फ्रेश होकर मुहँ साफ करके आ जाओ ,और साथ में वर्द्ध,बच्चे व् महिलाओं को साथ ले कर आवे,जिस वक्ती से पैदल नहीं चला जायेगा उनके लिए बस कि सुविधा कि गयी ह साथ,रस्ते में सभी प्रकार कि सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी, समस्या समज कर यात्रा को न टाले, सभी ग्राम वासियों को उनकी लुगायाँ कि सोगंद, और लुगायाँ ने आपका बींद कि सोगंद ,जिनकी शादी नहीं हूही उनकी माता से मनत मांगने पर शादी हो जाएगी,इसलिए गाँव वालों से नम्र निवेदन ह कि जल्दी से जल्दी पैदल यात्रा में शरीक होने का कस्ट करें !
देखते ही देखते माता के नाम पर भक्तों कि भीड़ जुटने लगी और ढाणियों से व् गाँव से यात्रा में शामिल होते गए पलाशिया , पिपराली व् बाजोर तक लोग डी.जे.की आवाज सून कर अपने आप रोक नहीं पाए और माता की पैदल यात्रा में शामिल हो गए सब के चहरे खिले हुए और माता के जयकारे के साथ रिमझिम पर डान्स करते बाजोर पहुंचे वहां पर सब ने नास्ता व् चाय पि और वहीँ पहले वाली धून में चल पड़े जो भी रस्ते में मिला वो अपने आप को रोककर देखे बगेर नहीं रह सका !
रस्ते में किशोर धींवा (O . P . धींवा का छोटा भाई ) सीकर से बोलेरो लेकर 50 K .G . केला लेकर आया सब को खिलाया ,थोड़ी देर में किशोर टेलर,निशांत ,भी गाड़ी लेकर आये और पैदल यात्रियों को केले बाँट कर जल्दी ही माता के दर्शन को चले गए !
मोसम भी बड़ा सुहावना हो रहा था, साथ में रिमझिम पर बंशा धींवा ,झाबर मल सुंडा ,फूला सुंडा ,सेवा राम बलाई ,ओ.पि.धींवा ,महावीर धींवा ,किशोर नेहरा ,महावीर (चिमना राम धींवा )सतपाल , महेंद्र महला ,बबलेश ,महेंद्र डी.जे.,अमर चंद महला,लगभग गाँव के सभी साथी ,ओरतें व् छोटे -छोटे बच्चे डान्स कर रहे थे ,और तो और रेवासा गाँव में एक भांड व् एक और ,दोनों भी खूब हमारे साथ झूमे वो नजारा अलग ही था
माता के धाम में पहुँचते ही सब ने दर्शन किये और बस में बैठकर
ज्यों ही गाँव की तरफ चले फिर बस में वही माहोल बन गया महिलाओं ने गीत गाने शुरू कर दिया और बस में ही नाचते गाते वापिस गाँव रात को १०;०० बजे वापिस पहुंचे !
ये माहोल जीवन में एक यादगार बन गया !
!! अपने अज्ञान को दूर करके मन-मन्दिर में ज्ञान का दीपक जलाना भगवान् की सच्ची पूजा है !!
में हूँ ! आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
दिनांक २१-१०-२०१२ को शुबह ५;३० बजे गुंगारा से माँ भवानी जीण माता के लिए पैदल यात्रा शुरू की,साथ में रिम-झिम डी.जे. व् एक ५२ शीटर बस
तथा कम से कम १५० आदमी जिसमे महिला,वृद,व् बच्चे सभी शामिल थे ,
जेसे ही गाँव के महला परिवार के पास से पैदल यात्रा शुरू हूही सतपाल धिवां ने डी.जे. पर ऐलान किया, गुंगारा वोसियो, सब को सूचित किया जाता ह कि सभी लोग नींद से जग कर नहाना धोना करके घर से बहार आये और माता के पैदल यात्रा में शरीक होने का कष्ट करें, जो वक्ती न नहाना चाहे वो फ्रेश होकर मुहँ साफ करके आ जाओ ,और साथ में वर्द्ध,बच्चे व् महिलाओं को साथ ले कर आवे,जिस वक्ती से पैदल नहीं चला जायेगा उनके लिए बस कि सुविधा कि गयी ह साथ,रस्ते में सभी प्रकार कि सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी, समस्या समज कर यात्रा को न टाले, सभी ग्राम वासियों को उनकी लुगायाँ कि सोगंद, और लुगायाँ ने आपका बींद कि सोगंद ,जिनकी शादी नहीं हूही उनकी माता से मनत मांगने पर शादी हो जाएगी,इसलिए गाँव वालों से नम्र निवेदन ह कि जल्दी से जल्दी पैदल यात्रा में शरीक होने का कस्ट करें !
देखते ही देखते माता के नाम पर भक्तों कि भीड़ जुटने लगी और ढाणियों से व् गाँव से यात्रा में शामिल होते गए पलाशिया , पिपराली व् बाजोर तक लोग डी.जे.की आवाज सून कर अपने आप रोक नहीं पाए और माता की पैदल यात्रा में शामिल हो गए सब के चहरे खिले हुए और माता के जयकारे के साथ रिमझिम पर डान्स करते बाजोर पहुंचे वहां पर सब ने नास्ता व् चाय पि और वहीँ पहले वाली धून में चल पड़े जो भी रस्ते में मिला वो अपने आप को रोककर देखे बगेर नहीं रह सका !
रस्ते में किशोर धींवा (O . P . धींवा का छोटा भाई ) सीकर से बोलेरो लेकर 50 K .G . केला लेकर आया सब को खिलाया ,थोड़ी देर में किशोर टेलर,निशांत ,भी गाड़ी लेकर आये और पैदल यात्रियों को केले बाँट कर जल्दी ही माता के दर्शन को चले गए !
मोसम भी बड़ा सुहावना हो रहा था, साथ में रिमझिम पर बंशा धींवा ,झाबर मल सुंडा ,फूला सुंडा ,सेवा राम बलाई ,ओ.पि.धींवा ,महावीर धींवा ,किशोर नेहरा ,महावीर (चिमना राम धींवा )सतपाल , महेंद्र महला ,बबलेश ,महेंद्र डी.जे.,अमर चंद महला,लगभग गाँव के सभी साथी ,ओरतें व् छोटे -छोटे बच्चे डान्स कर रहे थे ,और तो और रेवासा गाँव में एक भांड व् एक और ,दोनों भी खूब हमारे साथ झूमे वो नजारा अलग ही थामाता के धाम में पहुँचते ही सब ने दर्शन किये और बस में बैठकर
ज्यों ही गाँव की तरफ चले फिर बस में वही माहोल बन गया महिलाओं ने गीत गाने शुरू कर दिया और बस में ही नाचते गाते वापिस गाँव रात को १०;०० बजे वापिस पहुंचे !ये माहोल जीवन में एक यादगार बन गया !
!! अपने अज्ञान को दूर करके मन-मन्दिर में ज्ञान का दीपक जलाना भगवान् की सच्ची पूजा है !!
में हूँ ! आम आदमी !
मक्खन लाल पूनिया
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